| सूचना परिकलन विश्व मूल्यांकन के तीन अवस्थाओं के साक्षी है। |
| प्रथम अवस्था: मेनफ्रेम परिकलन |
कंप्यूटर प्रणाली के तीन मूल कार्य होते है - प्रस्तुतीकरण, जो प्रणाली से उपयोगकर्ता के परस्पर प्रभावों का प्रबंध करती है । अनुप्रयोग, जो उस लॉजिक को सपोर्ट करती है कि डाटा के साथ क्या करना है और डाटा प्रबंधन, जो सूचनाओं के संग्रह को सपोर्ट करती है। |
| द्वितीय अवस्था : सेवार्थी सर्वर परिकलन |
उपयोगकर्ता अंतरापृष्ठ और ग्राफिक्स के साथ नए अनुप्रयोगों को उपयोगकर्ता की ओर से विकेन्द्रीकृत प्रक्रिया के लिए आवश्यक है। दो या दो से अधिक कंप्यूटरों में इन कार्यो के निष्पादन हेतु सेवार्थी सेवा परिकलन आवश्यक कार्य को वितरित करती है। एक सर्वर मेनफ्रेम के बराबर है उसमें यह समस्त क्लाइंट और संचार संचालन की गतिविधियों में सहयोग करती है किन्तु प्रक्रिया पूर्णरूप से क्लाइंट द्वारा की जाती है। |
| तीसरी अवस्था : नेटवर्क सेन्ट्रीक परिकलन |
हम एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ कंप्यूटर और अन्य डिवाइसों के बीच संपर्क परिकलन व्याप्त है। नेटवर्क सी/एस संकल्पना में आया था अब विभिन्न प्रकार के कंप्यूटरों को जोड़ना और एक दूसरे के साथ सक्रिय करना भी संभव है। वृहत् नेटवर्क की विख्यता, इंटरनेट परिकलन के अगले वेव के रूप में नेटवर्क केन्द्रीय परिकलन स्थापित की है। |
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देश की सूचना प्रौद्योगिकी में पूरी तरह भिन्न परिदृश्य के साथ, ईसीआईएल वर्तमान में निम्न प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग पर ध्यान दे रही है: |
- 3 - टीयर वस्तुकला
- वेव प्रौद्योगिकी
- ईआरपी
- डाटा भण्डागार और डाटा खनीज
- नेटवर्क सुरक्षा
- ई-अभिशासन
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ईसीआईएल अपने आंतरिक अनुसंधान और विकास प्रयासों के अलावा कुछ शिक्षा संस्थानों के लिए बाह्य स्त्रोत अनुसंधान एवं विकास कार्य और विविध अनुसंधान एवं विकास स्थापनाओं से तकनीकी जानकारी अर्जित कर रहीं है। |
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वर्ष भर में, ईसीआईएल ने बैंक, एलआईसी, कृषि, अस्पताल प्रबंधन, नागरिक सेवाएं आदि क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी समाधान प्रदान किए हैं। |